Agrawal Public School (Indore)

India / Madhya Pradesh / Indore
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Modified by Shriyansh Shrivastava(ExStudent KGII):

Situated at Bicholi Mardana. One of the best school present in Indore. Management, School Situation, Ground, facilities and teaching techniques are very good. One of the best technique’s is Learn By Fun (LBF). School has big grounds. School is good for students mental and physical health.
lbf.in/macaulay.html

मैकाले V/S एलबीएफ

Statements of 2nd Feb, 1835

“I have travelled across the length and breadth of India and I have not seen one person who is a thief. Such wealth I have seen in the country, such high moral values, people of such caliber; that I do not think we would ever conquer this country, unless we break the very back bone of this nation, which is her spiritual and cultural heritage, and therefore I propose that we replace her old and ancient education system, her culture, for if the Indians think that all that is foreign and English is good and greater than their own, they will lose their self-esteem, their native self-culture and they will become what we want them, a truly dominated nation.”
- Lord Macaulay in his speech of Feb 2, 1835,British Parliament



''मैंने भारत के कोने-कोने में भ्रमण किया है। यहां मैंने ऐसा एक भी व्यक्ति नहीं देखा जो किसी से भी कमतर पड़ता है। इस देश में मैंने इस तरह की समृद्धता, शिष्टता और लोगों में इतनी अधिक संभावना देखी है। और मैं यह सोच भी नहीं सकता कि हम यहां राज कर पाएंगे जब तक कि इनकी रीढ़ की हड्डी को ही न तोड़ दें जो कि इस देश के अध्यात्म और संस्कृति में निहित है। अतः मैं प्रस्ताव रखता हूँ कि हम यहां के पुरातन शिक्षातंत्र और संस्कृति को ही बदल दें। यदि ये भारतीय सोचने लगे कि विदेशी और अंग्रेजी ही श्रेष्ठ है और हमारी संस्कृति से उच्चतर है तो वे अपना अत्मसम्मान, अपनी पहचान तथा अपनी संस्कृति को ही खो देंगे। और तब वे वह बन जाएंगे जो उन्हें वास्तविकता में बनाना चाहते हैं। सही अथों में एक गुलाम देश''
जो क्लर्क बनाए वो शिक्षा नहीं
काबिल बनाए वो शिक्षा है सही
मैकाले का षडयंत्र या वैश्विक भारतीय सोच

पिछले 175 वर्षो में हमने शिक्षा के जिस स्वरूप को देखा वो गुणात्मक न होकर षडयंत्र का हिस्सा है, इसका बीज मैकाले ने 1835 में ब्रिटिश संसद में बोया था। इस समस्या का हल निकाला देश के अग्रणी स्वयंसिद्ध उद्यमी श्री पुरूषोत्तम अग्रवाल ने। स्वयं के दीर्घ अनुभव, गहन शोध, वैश्विक सोच और भारतीय संस्कृति के आधार पर एक मित्रवत वैश्विक क्रांति ने जन्म लिया, जिसका नाम है, एलबीएफ ।
क्लर्क फैक्टी या बुद्धिजीवियों का उद्गम

मैकाले की सोच ने सारहीन शिक्षा के जरिये क्लर्क बनने की सोच रखने वाली जनरेशन्स तैयार कीं । जहां स्वयं की सोच विकसित करने या नवीनता लाने या खुलकर विकास करने की बजाए हर महीने की सैलरी का इंतज़ार करने वाले लोग तैयार हुए। दूसरी ओर लर्न बाय फन व्यवहारिक ज्ञान रखने वाले, वैश्विक सोच के साथ आगे बढ़ने वाले विद्यार्थियों की नस्लें तैयार कर रही है।
जीहुजूरी या आत्मसम्मान

अगर किसी देश को ही कमज़ोर करना है तो उसके बाशिंदों का आत्मसम्मान ही नष्ट कर दो। फिर न वो उठेंगे और नहीं प्रतिरोध करेंगे। मैकाले की इसी सोच ने भारत में जी हुजूरी करने वाले युवाओं को तैयार किया। जिसका नजारा हमें दफ्तरों और कॉर्पोरेट्स में कहीं भी दिख सकता है। दूसरी तरफ लर्न बाय फन बच्चों को ज्ञानवान व सक्षम बनाने में यकीन करता है। अगर आपके पास ज्ञान है तो विश्वास स्वयं ही आ जाएगा और विश्वास सिर्फ उन्हीं के पास होता है जिनमें आत्मसम्मान हो। एलबीएफ की पुस्तकें बच्चों में आत्मबल, आत्मज्ञान और आत्मविश्वास पैदा करने में सफल हुई है। इसका प्रमाण है अल्पकाल में ही 1.5 लाख से अधिक विद्यार्थी, 5 लाख से अधिक पेरेन्ट्स, 10,000 से अधिक शिक्षक और 2000 से अधिक संतुष्ट स्कूल।
भाषा का डर या प्रगति का सफर

अंग्रेजी को महान और हिन्दी को दोयम दर्जे का मानना प्रगति में पहली रूकावट थी। मैकाले की अंग्रेजी दुनियाभर का ज्ञान तो लाई लेकिन हिन्दी की अवहेलना ने हमारी नींव कमज़ोर कर दी। इससे नाममात्र के लोग अंग्रेजी में पारंगत हुए लेकिन शेष पूरा देश कुछ भी पूर्ण रूप से लिखने, बोलने और पढने में कमज़ोर हो गया। एलबीएफ ने इस समस्या का हल इस तरह निकाला कि हर बच्चा अंग्रेजी का सही ज्ञान पाकर एक वैश्विक नागरिक तो बने ही साथ ही हिन्दी के जरिये अपनी जड़ें भी मजबूत करे। वह दोनों भाषाओं में कुशलता हासिल कर आसानी से अनुवाद भी कर पाएं। एलबीएफ में रीडर बुक के साथ कोर्स बुक भी प्रस्तुत की गई ताकि आठवीं तक बच्चा अंग्रेजी में भी पारंगत हो। पाठों को हिन्दी में भी प्रस्तुत किया गया ताकि लर्निंग तेज और कॉम्प्रेहेंसिव हो सके।
बोरिंग विषय या गणित

आर्यभट्ट और रामानुज के इस देश में गणित को बोरिंग विषय के रूप में प्रचारित किया गया ताकि इस विषय से भारत का एकाधिकार खत्म हो। बच्चों को रटना सिखाया गया, समय से पहले कैल्क्यूलेटर थमाए गए। लेकिन एलबीएफ ने गणित के मूल स्वरूप को जानकर उसे रोचक बनाया। प्रत्येक कक्षा के लिए क्रम और लय में सिलेबस तैयार किया गया। हर पाठ को पिछले पाठ के अगले पड़ाव के रूप में तैयार किया गया। बच्चों की यही काबिलियत उन्हें जिंदगी में सही निर्णय लेने के काबिल बना रही है।
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Coordinates:   22°42'4"N   75°55'6"E

Comments

  • it is new idea and somthing differnt thinking .i sporte your this base idea school .i m very impress.i always sport new idea .agrawal ji i am very thankful for your this idea any type of help from me i am always with you.schooling is not for parrot it is for a very beautifful and discover ourself .we use our brain only .somthing .we donot use our brain 100% . we want that computer give us his 100% speed but we donot know that how we activate take 100% use of our braine.10000 years we lived in our earth.i hope your student reserch your always sanyog sharma
This article was last modified 12 years ago