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गूलरपुरा का वैज्ञानिक दृष्टि से महत्व गूलरपुरा के ठीक ऊपर से होकर ये केन्द्रीय रेखा निकल रही है । गूलरपुरा का वैज्ञानिक दृष्टि से महत्व इसलिये अधिक है क्योंकि सारे वैज्ञानिक प्रयोग इसी केन्द्रीय रेखा पर किये जाते हैं । जिले में लगने वाले पूर्ण सूर्यग्रहण पर शोध पत्र तैयार कर रहे साहित्यकार पंकज सुबीर के अनुसार इस बार ग्रहण की केन्द्रीय रेखा हमारे जिले से होकर निकल रही है । ये केन्द्रीय रेखा खातेगांव तथा कन्नौद के ठीक बीच से होकर नसरुल्लागंज तहसील में सीप नदी के पास सूआपानी गांव से प्रवेश करेगी । इस केन्द्रीय रेखा के ठीक नीचे जो गांव पड़ रहा है वो लाड़कुई से पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित गांव गूलरपुरा है । इसके बाद ग्रहण की केन्द्रीय रेखा लाड़कूई तथा नसरुल्लागंज मार्ग को लाड़कुई से लगभग 3.5 किलोमीटर दूर पर क्रास करेगी, ये स्थान भी ग्रहण की केन्द्रीय रेखा के ठीक नीचे आ रहा है । इसके बाद ये ग्रहण की केन्द्रीय रेखा आगे की ओर बढ़ जायेगी तथा चकल्दी गांव से कुछ दूरी से होकर निकलेगी, इसके बाद कोलार नदी के ठीक पास से होती हुई रायसेन जिले में प्रवेश कर जायेगी । ग्रहण की ये केन्द्रीय रेखा सीहोर जिले की दक्षिणी सीमा तय करने वाली नर्मदा नदी के समानांतर होकर जिले से निकलेगी । इस प्रकार नसरुल्लागंज तहसील का वैज्ञानिक महत्व ग्रहण के दौरान सबसे अधिक रहेगा क्योंकि ग्रहण की केन्द्रीय रेखा इसी क्षेत्र से होकर निकलेगी । हालंकि पूरा का पूरा सीहोर जिला खग्रास सूर्य ग्रहण का साक्षी बनने जा रहा है पूर्ण सूर्यग्रहण जिस ढाई सौ किलोमीटर चौड़ी पट्टी पर दिखाई देगा उसका सबसे अंदर का हिस्सा अर्थात केन्द्रीय रेखा के दोनों ओर के लगभग साठ-साठ किलोमीटर के हिस्से में पूरा सीहोर जिला आ रहा है अत: खग्रास ग्रहण पूरे जिले में दिखाई देगा । लेकिन फिर भी यदि ग्रहण की केन्द्रीय रेखा से दूरी की बात की जाये तो नसरुल्लागंज से लगभग आठ किलोमीटर, रेहटी से 6 किलोमीटर, सीहोर से 30 किलोमीटर, इछावर से 20, बुदनी से 10 तथा आष्टा से 25 किलोमीटर की दूरी इस रेखा की रहेगी । सबसे नजदीक रहेगा लाड़कुई जो केवल साढ़े तीन किलोमीटर की दूरी पर रहेगा ।
Wikipedia article: http://hi.wikipedia.org/wiki/सीहोर_जिले_में_22_जुलाई_2009_को_पूर्ण_सूर्यग्रहण Category: Not approved
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